समझे ना

समझे ना

क्यूं छुपाती हूं अपने अहसास

क्यूं समझती हूं खुद को खास

क्यूं हर दिन बदल रहीं हूँ खुद को

क्यूं नासमझ सी रहती हूं

समझे ना

दीवारों से बातें करने लगी हुँ

अँधेरों से डरने लगी हुँ

चुप रहना खासियत थी मेरी

अब खुद से भी बातें करने लगी हुँ

समझे ना

तुम्हे समझने लगी हुँ।

कुछ कहता है

Plz..Respect your parents, ☺

बूढ़ा बरगद, पंक्षी का घर

रोती आंखें पर चुप हैं अधर

वो आसमान का उजियारा

रातों का अंधेरा सहता है

तुम सुनो दर्द उस जीवन का

जो चुप है वो कुछ कहता है।

हा नीम दरख्ते, कड़वा है

पर रोग उसी से मिटते हैं

हर पल सहारा बने वही

अब गिर कर रस्ते कटते हैं

हँस कर कहते में ठीक अभी

पर दुख तो मन में रहता है

तुम सुनो दर्द उस जीवन का

जो चुप है वो कुछ कहता है।

उसकी शाखाएं वृद्ध हुई

पर छांव अभी भी देती हैं

मांगे खुशियां वो तेरे लिए

गम हँसकर अब भी सहता है

तुम सुनो दर्द उस जीवन का

जो चुप है वो कुछ कहता है।

लाशें

कांप उठा तन,मन घबराया

देख बर्फ में जलती लाशें

हुआ नहीं ये मंजर अब तक

सूर्यताप में गलती लाशें

उठ जाती फिर उठ कर गिरती

जीवित है या हर पल मरती

हाथ बिखरते,पाँव लखड़ते

समतल पर ना संभलती लाशें

हुआ नहीं ये मंजर अब तक

सूर्यताप में गलती लाशें

काफी है

मेरी सुन लेना, अपनी कह देना

काफी है

मेरी नजरों से सपने बुन लेना

काफी है

कुछ ढूंढ रही हूं सागर में

बिखरा है जो मेरे हाथों से

तू बिखरे मोती चुन लेना

काफी है।

हँस लेते है , तेरे साथ सहज

बस पल दो पल की बात महज

इन पल को तू जीने देना

काफी है।

# दोस्ती।

कुछ खाली सा , कुछ भरा हुआ

इंसान खड़ा बाजारों में , चुपचाप किसी से डरा हुआ

पानी के दरिया सा लगता , कुछ खाली सा कुछ भरा हुआ

हाथों में लकीरें धुंधली सी , आंखों की पुतली उजली सी

फिर भी कीमत खुद की करता ,हो जाए जिंदगी संभली सी

ले लो कल फिर शायद में बिकूँ , मेरा मोल बदलता ख़रा हुआ

पानी के दरिया सा लगता , कुछ खाली सा कुछ भरा हुआ

कोई कहता तुम महंगे हो, कोई कहता इतना सस्ता

कोई कहता आगे ही बढ़ो, क्यूं घेरा है तुमने रस्ता

कीमत कम ज्यादा होती है 100 लाख का हाथी मरा हुआ

मेरे बच्चे भूखे न रहें, चाहे ले लो तुम मर हुआ

पानी के दरिया सा लगता , कुछ खाली सा कुछ भरा हुआ

,(,,,,,बेरोजगारी,,,,, के बदलते हालात)

कुछ खाली सा , कुछ भरा हुआ

इंसान खड़ा बाजारों में , चुपचाप किसी से डरा हुआ

पानी के दरिया सा लगता , कुछ खाली सा कुछ भरा हुआ

हाथों में लकीरें धुंधली सी , आंखों की पुतली उजली सी

फिर भी कीमत खुद की करता ,हो जाए जिंदगी संभली सी

ले लो कल फिर शायद में बिकूँ , मेरा मोल बदलता ख़रा हुआ

पानी के दरिया सा लगता , कुछ खाली सा कुछ भरा हुआ

कोई कहता तुम महंगे हो, कोई कहता इतना सस्ता

कोई कहता आगे ही बढ़ो, क्यूं घेरा है तुमने रस्ता

कीमत कम ज्यादा होती है 100 लाख का हाथी मरा हुआ

मेरे बच्चे भूखे न रहें, चाहे ले लो तुम मरा हुआ

पानी के दरिया सा लगता , कुछ खाली सा कुछ भरा हुआ

,(,,,,,बेरोजगारी,,,,, के बदलते हालात)

कुछ खाली सा , कुछ भरा हुआ

इंसान खड़ा बाजारों में , चुपचाप किसी से डरा हुआ

पानी के दरिया सा लगता , कुछ खाली सा कुछ भरा हुआ

हाथों में लकीरें धुंधली सी , आंखों की पुतली उजली सी

फिर भी कीमत खुद की करता ,हो जाए जिंदगी संभली सी

ले लो कल फिर शायद में बिकूँ , मेरा मोल बदलता ख़रा हुआ

पानी के दरिया सा लगता , कुछ खाली सा कुछ भरा हुआ

कोई कहता तुम महंगे हो, कोई कहता इतना सस्ता

कोई कहता आगे ही बढ़ो, क्यूं घेरा है तुमने रस्ता

कीमत कम ज्यादा होती है 100 लाख का हाथी मरा हुआ

मेरे बच्चे भूखे न रहें, चाहे ले लो तुम मर हुआ

पानी के दरिया सा लगता , कुछ खाली सा कुछ भरा हुआ

,(,,,,,बेरोजगारी,,,,, के बदलते हालात)

हम टूटे से

आगे बढ़ते सब छोड़ दिया

सब रहते हमसे रूठे से

कुछ पा न सके, खोया कुछ कुछ

हम रहे हमेशा टूटे से

हम किसी को यह समझा न सके

क्यूँ हमने खोया है सबको

कहते ही रहे कि हम क्या है

पर कभी नही जाना हमको

बंधे रहे क्यूँ बंधन से

थे रहे हमेशा छूटे से

कुछ पा न सके, खोया कुछ कुछ

हम रहे हमेशा टूटे से