लाशें

कांप उठा तन,मन घबराया

देख बर्फ में जलती लाशें

हुआ नहीं ये मंजर अब तक

सूर्यताप में गलती लाशें

उठ जाती फिर उठ कर गिरती

जीवित है या हर पल मरती

हाथ बिखरते,पाँव लखड़ते

समतल पर ना संभलती लाशें

हुआ नहीं ये मंजर अब तक

सूर्यताप में गलती लाशें

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काफी है

मेरी सुन लेना, अपनी कह देना

काफी है

मेरी नजरों से सपने बुन लेना

काफी है

कुछ ढूंढ रही हूं सागर में

बिखरा है जो मेरे हाथों से

तू बिखरे मोती चुन लेना

काफी है।

हँस लेते है , तेरे साथ सहज

बस पल दो पल की बात महज

इन पल को तू जीने देना

काफी है।

# दोस्ती।

कुछ खाली सा , कुछ भरा हुआ

इंसान खड़ा बाजारों में , चुपचाप किसी से डरा हुआ

पानी के दरिया सा लगता , कुछ खाली सा कुछ भरा हुआ

हाथों में लकीरें धुंधली सी , आंखों की पुतली उजली सी

फिर भी कीमत खुद की करता ,हो जाए जिंदगी संभली सी

ले लो कल फिर शायद में बिकूँ , मेरा मोल बदलता ख़रा हुआ

पानी के दरिया सा लगता , कुछ खाली सा कुछ भरा हुआ

कोई कहता तुम महंगे हो, कोई कहता इतना सस्ता

कोई कहता आगे ही बढ़ो, क्यूं घेरा है तुमने रस्ता

कीमत कम ज्यादा होती है 100 लाख का हाथी मरा हुआ

मेरे बच्चे भूखे न रहें, चाहे ले लो तुम मर हुआ

पानी के दरिया सा लगता , कुछ खाली सा कुछ भरा हुआ

,(,,,,,बेरोजगारी,,,,, के बदलते हालात)

कुछ खाली सा , कुछ भरा हुआ

इंसान खड़ा बाजारों में , चुपचाप किसी से डरा हुआ

पानी के दरिया सा लगता , कुछ खाली सा कुछ भरा हुआ

हाथों में लकीरें धुंधली सी , आंखों की पुतली उजली सी

फिर भी कीमत खुद की करता ,हो जाए जिंदगी संभली सी

ले लो कल फिर शायद में बिकूँ , मेरा मोल बदलता ख़रा हुआ

पानी के दरिया सा लगता , कुछ खाली सा कुछ भरा हुआ

कोई कहता तुम महंगे हो, कोई कहता इतना सस्ता

कोई कहता आगे ही बढ़ो, क्यूं घेरा है तुमने रस्ता

कीमत कम ज्यादा होती है 100 लाख का हाथी मरा हुआ

मेरे बच्चे भूखे न रहें, चाहे ले लो तुम मरा हुआ

पानी के दरिया सा लगता , कुछ खाली सा कुछ भरा हुआ

,(,,,,,बेरोजगारी,,,,, के बदलते हालात)

कुछ खाली सा , कुछ भरा हुआ

इंसान खड़ा बाजारों में , चुपचाप किसी से डरा हुआ

पानी के दरिया सा लगता , कुछ खाली सा कुछ भरा हुआ

हाथों में लकीरें धुंधली सी , आंखों की पुतली उजली सी

फिर भी कीमत खुद की करता ,हो जाए जिंदगी संभली सी

ले लो कल फिर शायद में बिकूँ , मेरा मोल बदलता ख़रा हुआ

पानी के दरिया सा लगता , कुछ खाली सा कुछ भरा हुआ

कोई कहता तुम महंगे हो, कोई कहता इतना सस्ता

कोई कहता आगे ही बढ़ो, क्यूं घेरा है तुमने रस्ता

कीमत कम ज्यादा होती है 100 लाख का हाथी मरा हुआ

मेरे बच्चे भूखे न रहें, चाहे ले लो तुम मर हुआ

पानी के दरिया सा लगता , कुछ खाली सा कुछ भरा हुआ

,(,,,,,बेरोजगारी,,,,, के बदलते हालात)

हम टूटे से

आगे बढ़ते सब छोड़ दिया

सब रहते हमसे रूठे से

कुछ पा न सके, खोया कुछ कुछ

हम रहे हमेशा टूटे से

हम किसी को यह समझा न सके

क्यूँ हमने खोया है सबको

कहते ही रहे कि हम क्या है

पर कभी नही जाना हमको

बंधे रहे क्यूँ बंधन से

थे रहे हमेशा छूटे से

कुछ पा न सके, खोया कुछ कुछ

हम रहे हमेशा टूटे से

राही…

सम्माननीय श्री निपुण सर् के जन्मदिन पर☺

*राही *

है जीत यही कि हार नहीं,

टूटा बिखरा इस बार नहीं

रजनी के शांत अंधेरों में

राहों को जगाए रखता है

चलता चल राही एक तू ही

संसार बचाए रखता है।

बदलेगा तू परिभाषा को

जीवन की रोती आशा को

न कदम रुके न ही सपने

तू तोड़ दे सघन पिपासा को

तेरे कदमों की आहट ने

रास्ता कितनों को दिखलाया

आगे बढ़ना ही जीत मेरी

बस आगे बढ़ना सिखलाया

हम भी मंज़िल पा लेंगे अब

बस निशां कदम के बनाते जा

कैसे तोड़े अँधियारो को

हमको यह राज बताते जा

मंज़िल मुश्किल पर जीतना है

जज्बा यह जगाए रखता है,

चलता चल राही एक तू ही

संसार बचाए रखता है।

मीरा

जहर सा जीवन , शूल सी बातें

सब सहती श्री हरि की दीवानी

तन दुर्बल, मन क्षीण हुआ

जोगन बन गयी ,महलों की रानी

संत , भजन, और हरि की छवि में

अपना हृदय रमाती है

मीरा, भोर सी पावन बेला

रात सी थक सो जाती है।

मीरा,,,,,

श्वेत कमल सी उज्जवल

शीतल जैसे नदियों का पानी

वंशी सी मधुरात ध्वनि वो

गली गली घूमे अनजानी

मिल जा श्याम हुई अब देरी

प्रीत के नेह लगाती है

मीरा, भोर सी पावन बेला

रात सी थक सो जाती है।