Jindagi or sapne…

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मेरा हाथ पकड़ लो पापाजी […….. my father is my strength……… ……my father is my hope………..]

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मेरा हाथ पकड़ लो पापाजी

……. my father is my strength………

……my father is my hope………..

मेरा जन्म हुआ , मुझे सांस मिली

जीवन की ज़िंदा आस मिली

ये बस एक प्यार का बंधन था

हर चीज मुझे पर खास मिली

अब नयी दिशा में चलना है

मेरी बात समझ लो पापाजी

ये जग सागर , में लहर बनूँ

मेरा हाथ पकड़ लो पापाजी

उंगली थामे स्कूल गए

हर वक्त हमारे साथ रहे

डर लगता था रस्तों से मुझे

पर कदम आपके साथ रहे

हो आप होसला रास्तों का ,

मेरे कदम तों गिन लो पापाजी

ये जग सागर , में लहर बनूँ

मेरा हाथ पकड़ लो पापाजी

डर से आगे बढ़ कर देखो

यह बात आपने समझायी

तुम भी एक पंछी अम्बर के

अब बनो सर्द सी पुरवाई

हिम्मत रखना मैं साथ तेरे

मेरी ढाल बने है पापाजी ,

ये जग सागर , में लहर बनूँ

मेरा हाथ पकड़ लो पापाजी

……… my father is my strength………

……my father is my hope………..

पिता

अम्बर की छाँव, धरती का विस्तार है पिताजी

मेरे लिए मेरे संसार है पिताजी

गर्म धूप में शीतल पवन से

सर्दी में तपते कम्बल से

बारिश में छाते का सहारा

हल्की ठंडी फुहार है पिताजी

मेरे लिए मेरे संसार है पिताजी

सच के साथ खड़ा रहना है

हर दुःख में सम्बल रखना है

तुम हो सही तो साथ खड़ा हूँ

पर गलत के लिए इंकार पिताजी

मेरे लिए मेरे संसार है पिताजी

Tom and Jarry show….In indian politics.

I know the youngsters would groan. Oh no! no politics please! But has anyone really tried. Trust me it’s fun.

I have always been a big fan of Tom and Jerry. Age has not mellowed their charm. Today I find the fight between the BJP and Congress or specifically Narendra Modi who has been very cleverly nicknamed as NaMo and the Congress almost allegoric. NaMo, the naughty Jerry is always one step ahead of the fat and lazy Congress which always seems to be huffing and puffing to catch him. But in this real life story there is not one Tom but an army of Toms. The young generation doesn’t believe in genuflections and give it as good as it comes. So these Toms, inspite of their position or reputation, receive dollops of cat food. The latest victim is Shashi Tharoor, a suave and erudite politician otherwise and someone I admire. After his latest outburst he has been declared as the English Laloo, an epithet that is bound to stick. I find the comparison Hilarious. I am sure Tharoor is not going to be amused.

If you are willing to sift the sleaze and the abuse in the twitter war, there are some funny nuggets. Space limits me to give only a few examples.

When Modi declared that he would charge Rs.5 for his speech in Hyderabad, within minutes someone suggested that he would pay double that amount if Digvijaya Singh promises to shut up. Another one said it is a small price to pay as we are paying a huge one for Manmohan’s Silence.

A lot of jokes float about Manish Tewari, The Information Minister, who has a propensity to speak as if he has swallowed a thesaurus. But the top in terms of jokes are poor Rahul Gandhi and the redoubtable Digvijay Singh. The compilation could make a book really, a best seller. Any Khushwant Singh around?

The punching bag is normally the Congress. But a Congress supporter, not to be out done came out with a gem, narendramodiplans.com. Sadly, the congress supporters lack a sense of humor and are generally abusive. I couldn’t find many rebuts which could come in the category of funny or clever.

Another one to prove my point. The CM of Rajasthan under fire for non-performance and corruption , came up with a FB page. It was alleged that he bought 40,000 likes from Istanbul. There was a joke that the opposition leader when she went touring said she worships and likes cows. The hapless CM replied he likes Bull , Istanbul.
Unfortunately, we Indians who otherwise have thick skins can be pretty thin-skinned about good-natured ribbing. Also, politics brings out the beast in us. Most of the Tweets exchanged are quite ugly. That doesn’t portend well. There are supporters hiding in the bushes to quickly attack you either as a Cong supporter or a BJP supporter. There is no space for unbiased and dispassionate discussion.

Imagine. The dates have not even been declared but there is a war out there.

It’s going to be one election campaign which we would have been better without. Only if both the parties keep their humor quotient!

Update: The narendramodiplans.com domain name now leads to a 404 GitHub page. In an email response to IBNLive, the creator of the website declined to elaborate upon the reasons behind taking down the site and emphasised that he/she “would want to stay out of this issue once and for all” and that he/she had “already removed the ‘quit’ note on the site.”

And one more thing……. Actually MOTU PATlU is my favourite….😊

तुमने देश को क्या दिया….?

“भारत , मुझे क्या, व मेरा क्या, की धारणा पर चल रहा है।”- श्री नरेन्द्र मोदी जी

हिरोशिमा और नागासाकी जैसी घटनाओं के बाद भी वो विश्व में अग्रसर राष्ट्रों की श्रेणी में है, हा वो जापान है, पता है अभी 4 दिन पहले वहाँ हड़ताल हुई, कर्मचारियों ने अपना गुस्सा जताने के लिए अपने एक माह का वेतन लेने से मना कर दिया पर अपना काम नही छोड़ा व वो पैसा देश को दे दिया- अब हमारे देश मे देखिए, हड़ताल हुई , ट्रेन की पटरियां उखाड़ दी गईं, बसें फूंक दी गईं, सड़को पर आग लगा दी, पता नहीं कितनों ने अपनी नाकाम जिंदगी बेवजह फ़ना कर दी, स्कूल बंद , कार्यालयों में छुट्टी, विश्वविद्यालयों के जाबांज सेनापति अपनी सेना को लेकर उतर पड़े युद्ध मे, पढ़ाई तो बाद की बात है ना,,,सब बंद सिर्फ मुँह के।। इनसे ये पूछो की अब ये किस मुँह से बैठेंगे इन बसों में , क्या ये सड़को पर चलने के भी काबिल है,

पूरे समय कुछ न कुछ मांगते हो, बता सकते हो तुमने क्या दिया देश को,,,,,,

चलता है , इतना तो चलता है, 1 मिनट ही तो लेट हुए है, अरे सोचो भाई , अगर 2 करोड़ कर्मचारी भी 1-1 मिनट देरी से आते है तो देश का तो 2 करोड़ मिनट का नुकसान हो गया न।

कार्यदिवस से ज्यादा तो छुट्टियां है हमारे लिए,हम महापुरुषों के नाम पर छुट्टी करते है, कभी उनके कार्यों से प्रेरित हो कार्य करने का प्रयास ही नहीं करते, ओर कहते है कि विकास होगा।

अब ऐसा तो है नहीं कि दूर आसमान से एक परी उतर कर आएगी, जादू की छड़ी घुमाएगी ओर बोलेगी- सबसे अलग है सबसे खास, इसीलिए हो जाए भारत का विकास,,,,,,,,,?

अब तो ये हाल है कि जिस संस्कृति और शर्म ये लिए हम जाने जाते थे वो भी आखरी सांसे गिन रही है, कौन पूछता है अब उसको, नदियाँ जल बटवारें के लिए अड़ी हुई हैं, पर्वत भूकंप लाने को तत्तपर हैं, खेत अनाज की जगह जहर उगला रहे है,और हम अभी ये ढूंढ रहे हैं कि हम हिन्दू है या मुस्लिम, लिंगायत है या वीरशैव,,, एक बात बताऊं, हम इंसान है।

राजनीति में सूक्ष्म जीव…..

कुछ ऐसे सूक्ष्म जीव जो सूक्ष्मदर्शी से भी नहीं दिखते,ऐसे ही जीव देश की राजनीति में प्रवेशित है, वो नही जानते कि उनकी उपस्थिति सिर्फ रोग मात्र के लिए है।

उनका ये समझना कि राजनीतिक दल को उनका समर्थन देश के प्रति उनके बलिदान एवं निष्ठा का परिचायक है, बिल्कुल गलत होगा। उन्हें समझना चाहिए वे सिर्फ रोग वाहक या रोग जनक के रूप में ही इन दलों द्वारा उपयोग में लाए जाएंगे, मानते है कि वे देशभक्त है, सही हाथों में देश को देखना चाहते है, लेकिन सिर्फ समर्थन मात्र तो कोई तरीका नही देशप्रेम का, करना है तो कुछ प्रत्यक्ष कीजिये, आयुर्वेदिक दवा के रूप में ताकि इलाज भी हो और दिखाई भी दे, निकलिए इन दल समर्थन से बाहर ओर देखिए कि आप सिर्फ सूक्ष्म नहीं, सक्षम है।कुछ करिए , करके दिखाइए, आप भी तो है, क्या आपकी उपस्थिति माइने नहीं रखती, दल, दल ही रहेंगे और दल बदलते भी रहेंगे, सिर्फ दो चीजें नही बदलेंगी,,,,, देश और आप , अब तो आप समझ चुके होंगे,,,, सूक्ष्म जीव बनना है या आयुर्वेदिक दवा। अरे रुकिए आप सूक्ष्म जीव के रूप में भी क्रांति ला सकते है पर कैंसर को पैदा करके , उसका इलाज अभी संभव नही होगा।

💐माँ शब्द नहीं, संसार -:💐

कहकर माँ को रब जैसा माँ के भोलेपन पर में प्रश्न नहीं उठा सकती , ईश्वर , ईश्वर है पर, माँ सिर्फ माँ है !

ये सिर्फ माँ माँ है , माँ की व्याख्या सिर्फ माँ है , माँ का वर्णन केवल माँ है , केवल माँ ही माँ जैसी ,रब नहीं है माँ जैसा !

ईश्वर हर जगह हो नहीं सकता इसलिए , माँ बनाई !

न में गुणी हूँ न ज्ञानी और न इतना जग जाना है पर माँ शब्द का अस्तित्व जानने की चाह में इतना भेद तो समझ में आ गया हें कि ईश्वर लाख जतन कर ले वो माँ जैसा नहीं बन सकता !

एक ठिठुरती सर्द रात में , क्या देखा है कभी किसी ने उस ईश्वर को गीले बिस्तर पर सोते हुए ?

नहीं यह माँ है !

अरे वो तो पूरी कायनात का जादू लेकर बैठा है , कोई करिश्मा कर भी दे तो इसमें क्या बड़ी बात है

पर मैने महसूस किया है , माँ के छूने भर से ही कैसा जादू होता है !

गहरे से गहरा दुःख भी छूमंतर हो जाता है !

अरे कहाँ वो इतना दरियादिल कि झूंठ मूंठ के आंसू से पिघलकर , जान बूझकर सारा छल , अपने बच्चों के लिए धरती माँ को डांट लगाये !

कहकर माँ को रब जैसा माँ के भोलेपन पर में प्रश्न नहीं उठा सकती , ईश्वर , ईश्वर है पर, माँ सिर्फ माँ है !

ये सिर्फ माँ माँ है , माँ की व्याख्या सिर्फ माँ है , माँ का वर्णन केवल माँ है , केवल माँ ही माँ जैसी ,रब नहीं है माँ जैसा !

सच कहा है की –

न जाने कैसा जादू है , माँ के नर्म हाथों में कि सूखी रोटी भी उसकी तो घी चुपड़ी सी लगती है

तेरी वो डांट वो फटकार वो गुस्से भरी आँखे , तेरी वो गालियां भी मिश्री सी लगती है

कि डुबाने वाले तू सुनले, मुझे माँ की दुआओं से,

चढी गंगा भी मझदार में उतरी सी लगती है